Wednesday, May 6, 2009

नीद ठहर जा


नीद कुछ पल ठहर जा
एक अच्छा सा ख्वाब
आँखों में आने दे.......
भागम भाग में
कट गया दिन
कर्वी हकीकतो से
भर गया दिल
तंग गलियों में एक
आजाद ख्याल आने दे
नीद कुछ पल ठहर जा .....
मिट जाए आज की थकान
आ जाए कल की स्फूर्ति
आज के सुंदर लम्हों को
धागों में पिरोने दे ......
नीद कुछ पल ठहर जा
एक अच्छ सा ख्वाब
आँखों में आने दे ........

9 comments:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

एक अच्छ सा ख्वाब
आँखों में आने दे ........


sunder abhivyakti, sashakt prastutikaran. word verification hata den.

Ravi Srivastava said...

भागम भाग में
कट गया दिन
कड़वी हकीकतो से
भर गया दिल
तंग गलियों में एक
आजाद ख्याल आने दे....
क्या बात लिखी है... एकदम हकीक़त से भरपूर.

लेकिन ...

नीद कुछ पल ठहर जा
एक अच्छ सा ख्वाब
आँखों में आने दे ........ ये कैसे संभव हो सकता है? जब तक नींद नहीं आएगी, तब तक ख्वाब कैसे आ सकेंगे. यह बात कुछ समझ में नहीं आई .

आज मुझे आप का ब्लॉग देखने का अवसर मिला. सच में बहुत अच्छा लगा. आप के अमूल्य सुझावों और टिप्पणियों का 'मेरी पत्रिका' में स्वागत है...

Link : www.meripatrika.co.cc

…Ravi Srivastava
E-mail: ravibhuvns@gmail.com

अर्चना गंगवार said...

rajneesh ji ....
aapki prtikriya ka sukrriya.....
sujhav per amal karne ki kosis rahegi

अर्चना गंगवार said...

ravi ji rachna per apni rai dene ka sumrriya...

kuch khwab khuli aanko se hi dekhe jate hai.....fir hum jub so jate hai tu man ke kisi kone ki chav mein apni jagah bana lete hai....

shayad isliye hum khud bhi bekhaber hote hei ki kitne khwab hamare man mein kaid rahete hai....

Vijay Kumar Sappatti said...

mujhe aapki ye rachna bahut acchi lagi .. man ko choo gayi .. aap bahut aacha likhti hai ..

itni acchi rachna ke liye badhai ..............

meri nayi poem padhiyenga ...
http://poemsofvijay.blogspot.com

Regards,

Vijay

dilip said...

apki sabhi kavitaye bahut achi he

dilip said...

apki sabhi kavitaye bahut achi he

रितेश चौधरी said...

ख्वाबों में जागते रहना, बेख्वाब सोने से अच्छा है
इसलिए आपका लेख वाकई में बहुत काबिले तारीफ है

Archana Gangwar said...

शुक्रिया रीतेश चौधरी जी