Friday, March 12, 2010

पहचान

 
                         पहचान 

                     सुबह से पूछते
                     शाम तक ढूंढते
                     रात को थक कर
                     सो जाते ...........

                    नहीं जान पते
                   अपनी पहचान

                   क्या करने आये है .?
                   क्या किया है ....   ?
                   क्या करके जायेंगे ?

                  कौन है हम
                  बताओ तुम......

                 सुबह से फिर दूंदने
                 शुरू हो जाते ....................
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पत्थर फैकने वालो .....



पत्थर  फैकने  वालो ......

मेरे  कांच  के  घर   पर
पत्थर फैकने  वालो
अब  तुम  बुरे  नहीं  लगते......

तुम्हारे  रंग  बिरंगे  पत्थर  
हमें  नज़र  आते  है
वो  तुम्हारे  आक्रोश  को  
मुझ  तक  लाते  है........

जो  तुम  नहीं  कह  पाते  हो 
वो  कह  कर  जाते  है

पर  मेरी  पीठ  सहलाने  वालो
हमको  गले  लगाने  वालो
जो  आस्तीन   मैं  सांप  लाते  हो 

उनसे  हम  रात  को  डर  जाते  है  
अक्सर  नीद  से  जग  जाते  है ..............

Tuesday, January 12, 2010

saath

Saath

Duniya mein Saare log ek dosere se shayad
Ise philosphey se jore hai.

Saath

Rohe Ko..
Zism Ka…..

Zism Ko..
Jaan Ka……

Jaan Ko..
Dil Ka……..

Dil Ko..
Man Ka……

Saath ChaHiye

Aur Man Ko ??????

Ek Aur man Ka…….
Saaath ChaHiye……

Thursday, September 24, 2009

अस्तित्व

मैंने कई बार देखा है
दो इंटो के बीच se अंकुर फूट ते
मैंने कई बार देखा है दीवार पर पीपल को जमते......
जो बस यही कहता है.......
जहाँ ज़रा सी ,ज़रा सी मिटटी थी.......
जहाँ ज़रा सी , ज़रा सी धुप थी......
जहाँ ज़रा सा, ज़रा सा पानी था .......
हां एक अंकुर का अस्तित्व था
वहां मिटटी, धूप और पानी था

Wednesday, September 23, 2009

जो तपा नही


जो तपा नही
वो गला नही

जो गला नही
वो ढला नही

जो ढला नही
वो बना नही

जो बना नही
वो गढा नही

तो फ़िर चले
कहा ....
अपनी अपनी मंजिल में तपने के लिए

Saturday, September 19, 2009

मज़ा किसमे है

मज़ा किसमे है मज़ा किसमे है ....? रूठने में या मनाने में मज़ा किसमे है ....? खुद मुस्कराने में या मुस्कराहट देने में मज़ा किसमे है ....? अपने बचपने में या बच्चो के बचपने में मज़ा किसमे है ....? फिसलने में या फिसलने से बच जाने में मज़ा किसमे है ....? पैसा बचाने में या पैसा खर्च करने में मज़ा किसमे है ....? ज़िन्दगी बचाने में या ज़िन्दगी खर्च करने में मज़ा किसमे है ....? दास्ताँ सुनाने में या दास्ताँ सुनने में मज़ा किसमे है ??????????

Wednesday, May 20, 2009

प्यास


पानी से मत पूछो
प्यासे से पूछो
प्यास क्या होती है

यदि पानी को
ज्ञान हो जाए
प्यासे की प्यास का
तू शायद वो
बहना छोर दे

रुक जाए ,थम जाए
और कही तालाब बन
कर दूषित हो जाए .

जब से इन्सान को
अपना ज्ञान हो गया है
तभी से वो तालाब की
तरह दूषित हो गया है .

Monday, May 11, 2009

हां में पत्थर हूँ

हां मैं पत्थर हूँ
मेरी ठोकर सिर्फ़
दर्द ही नही देती

धीरे से कहती भी है
रूको ,देखो ,
कही तुम
ग़लत तो
नही जा रहे हो