शाम तक ढूंढते
रात को थक कर
सो जाते ...........
नहीं जान पते
अपनी पहचान
क्या करने आये है .?
क्या किया है .... ?
क्या करके जायेंगे ?
कौन है हम
बताओ तुम......
सुबह से फिर दूंदने
शुरू हो जाते ....................
Saath
Duniya mein Saare log ek dosere se shayad
Ise philosphey se jore hai.
Saath
Rohe Ko..
Zism Ka…..
Zism Ko..
Jaan Ka……
Jaan Ko..
Dil Ka……..
Dil Ko..
Man Ka……
Saath ChaHiye
Aur Man Ko ??????
Ek Aur man Ka…….
Saaath ChaHiye……

बाहर खड़ा है योगी बोले मीठी बोली
ये दुनिया है खेल तमाशा ले ले ज्ञान की गोली
मोह माया में फंसा है तू करता है हमजोली
कैसेट ले ले पुस्तक ले ले ,पढ़ ले थोरी थोरी
खर्चे मेर बहुत बढ़ गए ,कर न आँख मिचौली
थोरा सा तू पैसा दे दे ,ले ले ताबीज मोरी .........
बहुत बार में योगी हूँ,न जाता किसी के द्वार
बेटे में दिक्कत में है, करना है उपचार........
रोग तुम्हारा मुझे पता है, करना है निदान
गुरु मंत्र में छुपा हुआ ,तेरा सारा इलाज .......
मोह माया तू चोरे के आजा ,गांठ में पैसा ले के आजा
चिलम पिला दे फूँक लगा दे ,मुद्रा दे दे थोरी........
जोगिया रंग है धारा मेंने कपडा hai videshi
bahut se shishya door se baithi leti gyan ki goli .....
